मैं शिक्षक हूँ नई सदी का
नये सिरे से बात करुँगा,
जिन बच्चों में प्रतिभा पावन
उनके सिर पर हाथ धरुँगा।
मेरे पास माप हैं काफी
पहले प्रतिभा तोल करुँगा
भर्ती की गुंजाइश होगी
फिर प्रवेश का मोल करुँगा।
कोई भी अभिभावक आये
भेदभाव की बात न होगी।
पहले आये, पहले पाये
सिवा फीस के बात न होगी।
फीस जमा होने पर सबको
लिट्रेचर भेजा जायेगा,
नियम उपनियम शर्त सभी का
ब्यौरा भी भेजा जायेगा।
अभिभावक यदि अनपढ़ हो तो
किसी पठित से पढवा सकते,
कुछ दिन तक तो छूट रहेगी
फिर शर्तों में आ-जा सकते।
बच्चों को इस नये स्कूल में
नई ड्रेस में आना होगा,
नई किताबें, नया पाठ्यक्रम
‘बिग’ बस्तों को लाना होगा।
अभिभावक को छूट रहेगी
भारी बस्ते वे खुद लायें,
बच्चे यदि पैदल न आयें
टैम्पो में उनको बिठलायें।
यदि टैम्पो भी न आता हो
स्कूल-बस्स की फीस चुकायें,
स्कूल-बस्स यदि लेट चले
उस दिन बच्चों को न भिजवायें।
स्कूल ड्रेस और पाठ्यपुस्तकों
की दुकानेण निश्चित होंगी,
बच्चा घर पर समझायेगा
सबकी दरें सुनिश्चित होंगी।
इस मसले पर कोई शिकायत
मैं किससे भी नहीं सुनूँगा।
जो बच्चे को टिप-टाप लाये
उसी शख्स से बात सुनूँगा।
विद्यालय का भवन
अभी छोटा रक्खूंगा।
कुछ महीनों तक इसे
किराये पर रक्खुंगा।
फीस बढ़ाकर फिर
इसको तो शिफ्ट करुंगा।
नया भवन बनवाकर
उसको गिफ्ट करुंगा।
मेरी टेबल के शीशे के
नीचे मानचित्र है।
नये भवन की हर सुविधा
का ध्यान-चित्र है।
विद्यालय का स्टाफ
सुपर प्रशिक्षित होगा,
वेतन उनका फीस मुताबिक
निश्चित होगा।
एक पार्टनर यह सारा
इन्तजाम करेगा,
लेखाविज्ञ रात-दिन
बैठा काम करेगा।
हर बच्चे का बायो-डेटा
सयलभ रहेगा,
सब पर साइन अभिभावक
का साथ रहेगा।
प्रोग्रेस भी बच्चों की
सबको विदित रहेगी,
अभिभावक के हस्ताक्षर
की सनद रहेगी।
कोई भी अधिकारी आये
जाँचे परखे,
सभी मुकम्मिल
अभिलेखों को देखे-निरखे।
विद्यालय का नाम
मान्यता में अंकित है,
अभिलेखों में सभी जगह
सुन्दर टंकित है।
कुछ लोगों को लगे
अटपटा नाम स्कूल का,
तो बस काफी ‘इंगलिश-मीडियम”
नाम स्कूल का।
इस माध्यम से बच्चे सीखें
अभिभावक भी सीख सकेंगे,
बच्चों की टिट-बिट गिट-पिट
पाड़ोसी भी सीख सकेंगे।
अन्य विषय भी साथ चलेंगे
पर इंगलिश तो सबसे ऊपर,
बच्चों को संस्कारित करना
इसके बल पर इसके ऊपर।
सिस्टम बदल-बदल कर रक्खूं
‘मांटेसोरी’ ‘कींडर गार्टन’
हर व्यक्ति को लगे
इस तरां नाम ‘मोडरन’।
‘नरसरि, के॰ जी॰
मार-पीट बरदाश्त करेगी,
नन्हीं पीढ़ी नते गुरु की
‘विद्या-पोट’ स्वीकार करेगी।
अभिभावक अपने धन्धे में
स्वस्थ रहेंगे,
चार घड़ी की बक-झक से
निश्चिन्त रहेंगे।
नई सदी में नये रास्ते
पास हुआ, विद्यालय नाम,
फेल हुआ तो और खुले हैं
भर्ती के अनगिन आयाम।
अभिभावक विश्वास धारलें
बालक कम्प्यूटर जानेगा,
कपई चाहे अड़े सामने,
उसका तो लोहा मानेगा।
अभी-अभी तो शुरुआत है
सोच समझकर भार उठायें,
तुरत-फुरत लें नये फैसले
आगे बढ़कर कदम उठायें।